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Delhi- NCR में Stray Dogs हटाने के Supreme Court Order पर Gandhi परिवार का एक सुर – चारों नेताओं ने जताया विरोध, Social Media पर छिड़ी बहस

दिल्ली-एनसीआर की सड़कों से स्ट्रे डॉग्स (आवारा कुत्तों) को हटाने के सुप्रीम कोर्ट के आदेश ने बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। हैरानी की बात ये है कि इस मामले में गांधी परिवार के चार सदस्य – राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा, वरुण गांधी और मेनका गांधी – अलग-अलग राजनीतिक दलों में होने के बावजूद एक ही सुर में बोलते नज़र आए। सभी ने इस आदेश को क्रूर, अव्यावहारिक और अमानवीय बताया है।

क्या है मामला?
सोमवार को सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस आर महादेवन की बेंच ने आदेश दिया कि दिल्ली-एनसीआर की सड़कों से स्ट्रे डॉग्स को हटाया जाए। कोर्ट ने कहा कि हालात “बेहद गंभीर” हैं, खासकर बच्चों में डॉग बाइट और रेबीज़ के मामलों में बढ़ोतरी हो रही है, जिससे मौतें भी हो रही हैं।
ये केस सुओ मोटो था, यानी किसी ने शिकायत नहीं की थी, बल्कि कोर्ट ने खुद मामले को उठाया।

राहुल गांधी का बयान
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने X (ट्विटर) पर लिखा –
“ये आदेश दशकों से अपनाई जा रही मानवीय और साइंस-आधारित नीति से पीछे हटना है। ब्लैंकेट रिमूवल क्रूर है, दूरदर्शिता की कमी है और हमारी करुणा छीन लेता है।”
उन्होंने कहा कि शेल्टर, स्टेरिलाइज़ेशन, वैक्सीनेशन और कम्युनिटी केयर से बिना क्रूरता के सड़कों को सुरक्षित बनाया जा सकता है।

प्रियंका गांधी वाड्रा की प्रतिक्रिया
प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा –
“कुछ हफ्तों में सभी डॉग्स को शेल्टर में भेजना भयानक अमानवीयता होगी, क्योंकि इतने शेल्टर मौजूद ही नहीं हैं।”
उन्होंने डॉग्स को “सबसे खूबसूरत जीव” बताया और कहा कि जानवर पहले से ही शहरी इलाकों में बहुत तकलीफ़ झेलते हैं। उन्होंने इस स्थिति से निपटने के लिए ज्यादा मानवीय तरीका खोजने की अपील की।

वरुण गांधी की टिप्पणी
पूर्व BJP सांसद वरुण गांधी ने आदेश को “Institutionalisation of cruelty” बताया।
उन्होंने कहा –
“ऐसा सोचना एक कानूनी ढांचा बना सकता है जो उन पर कार्रवाई करेगा जो खुद की रक्षा नहीं कर सकते। कल को ये सोच स्ट्रे गायों, गरीबों की बस्तियों तक पहुंच सकती है।”
उनके मुताबिक, जब कोई देश सहानुभूति से दूर हो जाता है, तो वो नैतिक संकट का शिकार हो जाता है।

मेनका गांधी का विरोध
पूर्व केंद्रीय मंत्री और एनिमल राइट्स एक्टिविस्ट मेनका गांधी ने आदेश को “अव्यावहारिक, आर्थिक रूप से असंभव और पर्यावरण के लिए नुकसानदायक” बताया।
उन्होंने कहा –
“अगर इस आदेश का पालन करना पड़ा, तो 3 लाख डॉग्स को पकड़कर 1,000–2,000 शेल्टर बनाने होंगे और इस पर कम से कम ₹4–5 करोड़ का खर्च आएगा।”
मेनका गांधी का दावा है कि आदेश एक ऐसी रिपोर्ट पर आधारित है जिसमें एक बच्चे की मौत को गलत तरीके से डॉग अटैक से जोड़ा गया।

सोशल मीडिया पर गरमा-गरम बहस

  • समर्थकों का तर्क – डॉग बाइट और रेबीज़ की वजह से कई मौतें हो रही हैं, इसलिए कार्रवाई ज़रूरी है।
  • विरोधियों का तर्क – आदेश अव्यावहारिक है, क्रूर है और जानवरों के साथ बर्बरता होगी।

ये पहला मौका है जब गांधी परिवार के चार बड़े नेता एक ही मुद्दे पर एक साथ खड़े दिख रहे हैं। मामला सिर्फ स्ट्रे डॉग्स के हटाने का नहीं, बल्कि मानवीय संवेदनाओं बनाम पब्लिक सेफ्टी की बहस का बन गया है। आने वाले दिनों में ये विवाद और बड़ा हो सकता है, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट के आदेश को लेकर अब पॉलिटिक्स, सोशल मीडिया और पब्लिक ओपिनियन – तीनों में अलग-अलग राय साफ़ नज़र आ रही है।

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