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Punjab से Chandigarh छीनने के central government के नापाक मंसूबों को सफल नहीं होने देंगे — Chief Minister

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने केंद्र सरकार की उस योजना का जोरदार विरोध किया है, जिसके मुताबिक संविधान की धारा 240 में बदलाव करके चंडीगढ़ को अन्य केंद्र शासित प्रदेशों की तरह बनाया जा सके। मान ने कहा कि यह कदम पंजाब से उसकी राजधानी — चंडीगढ़ — छीनने की कोशिश है, और वे इसे किसी भी हालत में सफल नहीं होने देंगे।

केंद्र का प्रस्ताव क्या है मुद्दा?

केंद्र सरकार की योजना है कि संसदीय सत्र में धारा 240 में संशोधन किया जाए ताकि चंडीगढ़ को अन्य यूटी (केंद्र शासित प्रदेशों) की तरह घोषित किया जा सके। इस कदम से चंडीगढ़ पर पंजाब की पहुँच कमजोर हो सकती है, क्योंकि वह अब “पंजाब की राजधानी” के बजाय एक केन्द्रशासित क्षेत्र बन सकता है।

मुख्यमंत्री मान ने इस प्रस्ताव को भ्रष्ट और अन्यायपूर्ण करार दिया। उनका कहना है कि पंजाब को उसकी राजधानी से वंचित करना “धक्केशाही” है, और यह फैसला पंजाबियों के अधिकारों के खिलाफ है।

पंजाब का इतिहास और पृष्ठभूमि

  • 1966 में पंजाब के विभाजन के बाद, चंडीगढ़ को अस्थायी रूप से केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया था।
  • उस समय यह कहा गया था कि एक दिन चंडीगढ़ को पंजाब को वापस दिया जाएगा।
  • लेकिन आज तक यह वादा पूरा नहीं हुआ है, जिससे पंजाब में असंतोष बना हुआ है।
  • मान ने याद दिलाया कि देश में यह दुर्लभ मामला है जहाँ एक राज्य को उसकी राजधानी से वंचित किया गया हो।

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के बयान क्या कहा उन्होंने?

  • उन्होंने एक बयान में कहा कि चंडीगढ़ पंजाब का अविभाज्य हिस्साहै — “था है, है और हमेशा रहेगा।”
  • मान ने चेतावनी दी कि केंद्र सरकार के नापाक मंसूबे कभी सफल नहीं होंगे।
  • उन्होंने कहा, “हम यह किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेंगे कि हमारी राजधानी हमारी पहुँच से बाहर हो जाए।”
  • मुख्यमंत्री का कहना है कि यह प्रस्ताव पंजाब के साथ अत्याचार की तरह है और इसे तुरंत बंद किया जाना चाहिए।
  • उन्होंने यह भी कहा कि पंजाब लंबे समय से केंद्र की दखलंदाजी का शिकार रहा है और अब मोदी सरकार ऐसी योजना लाकर पंजाबियों की भावनाओं पर नमक छिड़क रही है।

संवैधानिक और कानूनी नजरिया

धारा 240 भारतीय संविधान की वह व्यवस्था है जो केंद्र सरकार को कुछ केंद्र शासित प्रदेशों के लिए “नियम” (regulations) बनाने का अधिकार देती है। मान के मुताबिक, इस अधिकार का दुरुपयोग कर चंडीगढ़ को पंजाब से अलग किया जा सकता है, जिससे राज्य का राजनीतिक और ऐतिहासिक अधिकार खतरे में पड़ सकता है।

मुख्यमंत्री का तर्क है कि पंजाब को अपनी राजधानी का पूर्ण अधिकार होना चाहिए — जैसे अन्य राज्यों को उनकी राजधानी होती है — लेकिन यह अधिकार अब चंडीगढ़ के मामले में ठेठ “राजनीतिक पाला बदलने” जैसा हो सकता है।

विवाद का राष्ट्रीय महत्व

यह सिर्फ पंजाब-चंडीगढ़ का सवाल नहीं है। इस मुद्दे में संविधान, राज्यों के अधिकार, केन्द्र-राज्य संबंध और लैंगिक आधार पर राज्य पुनर्गठन जैसे बड़े रूपक शामिल हैं। मुख्यमंत्री मान के अनुसार, यदि यह प्रस्ताव पास हो गया, तो यह सिर्फ पंजाब को ही प्रभावित नहीं करेगा, बल्कि पूरे देश में “राज्य की राजधानी” के अधिकार को लेकर एक खतरनाक नजीर बनेगा।

मुख्यमंत्री मान ने साफ कहा है कि पंजाब सरकार इस प्रस्ताव के खिलाफ सख्त लड़ाई लड़ने को तैयार है। उन्होंने यह भी संकेत दिया है कि पंजाब इस मुद्दे को संसद में, सड़क पर और जनता के बीच उठाएगा।

यदि केंद्र अपनी योजना पर कायम रहता है, तो पंजाब और केंद्र सरकार के बीच तनाव गहराने की पूरी संभावना है।

पंजाब सरकार का कहना है: “चंडीगढ़ वापस हमारी ही होगी” — और वे यह दावा सिर्फ भावना नहीं, बल्कि संवैधानिक और ऐतिहासिक आधार पर कर रहे हैं।

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