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होर्मुज संकट के बीच तेल कंपनियों की चेतावनी, कच्चे तेल की कीमतों में आ सकता है बड़ा उछाल

दुनिया की बड़ी तेल कंपनियों और वित्तीय संस्थानों ने चेतावनी दी है कि अगर होर्मुज जलडमरूमध्य (Hormuz Strait) में जारी संकट लंबा खिंचता है तो आने वाले हफ्तों में कच्चे तेल की कीमतों में भारी बढ़ोतरी हो सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक स्तर पर इस्तेमाल योग्य तेल भंडार तेजी से घट रहे हैं, जिससे ऊर्जा बाजार पर दबाव बढ़ता जा रहा है।

अमेरिकी निवेश बैंक जेपी मॉर्गन की रिपोर्ट के अनुसार, साल 2026 की शुरुआत में दुनिया के पास करीब 8.4 अरब बैरल तेल का भंडार था, लेकिन इसमें से केवल 0.8 अरब बैरल ही तत्काल इस्तेमाल के लिए उपलब्ध था। रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर होर्मुज मार्ग लंबे समय तक प्रभावित रहता है तो सितंबर तक कई देशों के वाणिज्यिक तेल भंडार खतरनाक स्तर तक नीचे पहुंच सकते हैं।

इस दौरान सबसे हैरान करने वाली बात यह रही कि तेल आपूर्ति प्रभावित होने के बावजूद अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें उम्मीद के मुताबिक नहीं बढ़ीं। विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका द्वारा अतिरिक्त तेल आपूर्ति, रणनीतिक भंडारों के इस्तेमाल और अन्य स्रोतों से बाजार में आई सप्लाई के कारण कीमतों पर तुरंत असर नहीं पड़ा।

वहीं अमेरिकी तेल कंपनी शेवरॉन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी माइक वर्थ ने चेतावनी दी है कि अगले कुछ हफ्तों में तेल की कीमतें तेजी से बढ़ सकती हैं। उन्होंने कहा कि सुरक्षा के लिए रखे गए अतिरिक्त तेल भंडार तेजी से खत्म हो रहे हैं और बाजार की संकट झेलने की क्षमता अब पहले से काफी कम हो चुकी है।

माइक वर्थ के मुताबिक जून और खासतौर पर जुलाई महीने में कच्चे तेल की कीमतों में बड़ा उछाल देखने को मिल सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि मध्य-पूर्व का संघर्ष लंबा चलता है तो इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा और कई देशों में आर्थिक मंदी का खतरा बढ़ सकता है।

इसी तरह संयुक्त अरब अमीरात की सरकारी तेल कंपनी ADNOC के प्रमुख सुल्तान अल-जाबेर ने कहा है कि भले ही संघर्ष खत्म हो जाए, फिर भी होर्मुज मार्ग से तेल की सामान्य आपूर्ति बहाल होने में कई महीने लग सकते हैं। उनका अनुमान है कि पूरी तरह सामान्य स्थिति 2027 से पहले लौटना मुश्किल हो सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि देश अपने रणनीतिक तेल भंडार दोबारा भरना शुरू करते हैं तो वैश्विक बाजार में मांग और बढ़ेगी, जिससे कीमतों पर अतिरिक्त दबाव पड़ेगा। ऐसे में आने वाले महीने वैश्विक तेल बाजार और विश्व अर्थव्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।

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