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Punjab: खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के कंट्रोलर सरताज सिंह चीमा और डिपो होल्डर एसोसिएशन की बैठक में उठे अहम मुद्दे।

पंजाब।खाद्य एवं आपूर्ति विभाग, वेस्ट सर्कल के कंट्रोलर सरताज सिंह चीमा द्वारा नैशनल फूड सिक्योरिटी एक्ट (एन.एफ.एस.ए.) के तहत डिपो होल्डर वेल्फेयर एसोसिएशन के Punjab प्रधान मिट्ठू घेंट और अन्य पदाधिकारियों के साथ एक विशेष बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में ब्लॉक नंबर 21 और 29 के डिपो होल्डरों के लाइसेंस की नवीनीकरण प्रक्रिया और प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत लाभार्थी परिवारों को वितरित की गई गेहूं की मार्जिन मनी जारी करने की बात की गई। इससे लगभग 100 डिपो होल्डरों को बड़ी राहत मिली है।

इस अवसर पर एसोसिएशन के प्रधान मिट्ठू घेंट, राजकुमार शर्मा, हरदीप सिंह दीपी, सुखबीर सिंह, निर्भय सिंह और दविंदर सिंह बब्बी ने कंट्रोलर सरताज सिंह चीमा के साथ बैठक में डिपो होल्डरों की रोजमर्रा की समस्याओं के बारे में चर्चा की। उन्होंने मांग की कि इन समस्याओं का शीघ्र समाधान किया जाए।

खासतौर पर यह मुद्दा उठाया गया कि सरकार द्वारा राशन डिपुओं में इलेक्ट्रॉनिक तोल कांटे उपलब्ध कराना एक सराहनीय कदम है, लेकिन डिपो होल्डरों को इस प्रक्रिया में परेशानी हो रही है। ई-पोश मशीन पर राशन कार्ड धारकों के फिंगरप्रिंट लेने और गेहूं को तोलने में अधिक समय लगने के कारण एक दिन में केवल 50 राशन कार्ड धारकों को ही गेहूं का लाभ मिल पाता है। इससे अन्य लाभार्थियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है।

एसोसिएशन ने खाद्य और आपूर्ति विभाग के अधिकारियों से पॉलिसी को सरल बनाने की अपील की है ताकि डिपो होल्डर बिना किसी कठिनाई और समय की बचत के साथ प्रत्येक राशन कार्डधारक को गेहूं का वितरण कर सकें। डिपो होल्डरों का सुझाव है कि अगर सरकार 50 किलो की बजाय 30 किलो वाली गेहूं की बोरी राशन डिपो पर वितरित करे, तो इससे डिपो होल्डरों और लाभार्थी परिवारों का समय बच सकता है और खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों का काम भी आसान होगा।

डिपो होल्डर एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने एकजुट होकर यह आवाज उठाई है कि Punjab सरकार दिल्ली के मॉडल को अपनाकर डिपो होल्डरों को गेहूं वितरण प्रणाली पर दी जाने वाली कमीशन राशि बढ़ाए। उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार वहां के डिपो होल्डरों को प्रति क्विंटल 2 रुपये का कमीशन देती है, जबकि Punjab में डिपो होल्डरों के साथ भेदभाव किया जा रहा है। कोरोना महामारी के दौरान, प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना और अंत्योदय अन्न योजना के तहत गरीब और जरूरतमंद परिवारों तक अनाज पहुंचाने के दौरान कई डिपो होल्डर इस महामारी के शिकार हो गए और अपनी जान गंवा बैठे।

सरकार ने ऐसे परिवारों को नौकरी देने के बजाय उनकी स्थिति पर ध्यान नहीं दिया। एसोसिएशन ने मांग की है कि उन पीड़ित परिवारों के बच्चों को सरकारी नौकरी दी जाए और उन्हें मुआवजा राशि भी प्रदान की जाए।

योजना को पारदर्शी बनने पर दिया जा रहा जोर : चीमा

खाद्य और आपूर्ति विभाग के कंट्रोलर सरताज सिंह चीमा ने बताया कि विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों की टीम एकजुट होकर ‘प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना’ और ‘अंत्योदय अन्न योजना’ के तहत गरीब और जरूरतमंद परिवारों को वितरित की जा रही मुफ्त गेहूं योजना को सरल और पारदर्शी बनाने के लिए प्रयासरत है। उनका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि योजना से जुड़े प्रत्येक परिवार को उनका हक बिना किसी कठिनाई के मिले और गेहूं वितरण प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की धोखाधड़ी की संभावना समाप्त हो जाए।

चीमा ने यह भी कहा कि डिपो होल्डरों और विभागीय अधिकारियों तथा कर्मचारियों के बीच एक मजबूत और गहरे रिश्ते का होना स्वाभाविक है, लेकिन साथ ही यह भी जरूरी है कि लाभार्थी परिवारों के अधिकारों को नजरअंदाज न किया जाए। गेहूं का हर दाना उन परिवारों की अमानत है और इस अमानत में किसी प्रकार की ग़लतफहमी या धोखाधड़ी को किसी भी हालत में सहन नहीं किया जा सकता।

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